
तेरे दर्शन की आरजू दिल में उमा लहरी
तेरे दर्शन की आरजू दिल में,
हर घडी श्याम श्याम करता हूँ,
तू तो बेफिक्र होके बैठा है,
मै तेरा इंतजार करता हूँ,
तर्ज – मेरी किस्मत में तू नहीं शायद
देखता है तू सारी दुनिया को,
पालता है संभालता सबको,
अपने मालिक को देखना चाहूँ,
क्या ये हक़ सांवरे नहीं मुझको,
क्यों नहीं मिल रहा है तू मुझको,
कोशिशे भी हजार करता हूँ,
तुझसे बातें करूँ तमन्ना है,
उससे पहले ना मुझको मरना है,
शुक्रिया कह दूँ सांवरे तुझको,
और कुछ कामना रही ना है,
हाल-ऐ-दिल कैसे क्या कहूं तुझको,
की तुझे कितना प्यार करता हूँ,
वक़्त इतना उधार में दे दे,
मिलना मुझसे या आके ना कहदे,
जो भी है सामने आ कह मुझको,
कैसे मिल पायेगा पता दे दे,
लहरी चितचोर की छुपा क्यों है,
मिन्नते बार बार करता है,
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