
थक गया हूँ चलते चलते,
अब तो राह दिखा जाओ,
छूट गए है सारे सहारे,
अब तो थामने आ जाओ,
तर्ज – कसमे वादें प्यार वफा।
जिन पर मुझको गर्व था बाबा,
ये ना मुझको छोड़ेंगे,
सोचा ना था सबसे पहले,
वो ही नाता तोड़ेंगे,
तुमको ही अब अपना माना,
अपनापन दिखला जाओ,
कहती है ये दुनिया मैंने,
ऊंची मंज़िल पाई है,
उनको मैं कैसे समझाऊं,
कितनी ठोकर खाई है,
थाम लो मेरा हाथ ये बाबा,
मंज़िल तक पहुंचा जाओ,
मजबूरी में भक्ति मेरी,
नाटक जग को लगती है,
लाचारी में रोते रोते,
मेरी रातें कटती है,
है भगत ‘आकाश’ तुम्हारा,
दुनिया को बतला जाओ,
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