
थारी मुरली मनड़ो मोयो कान्हा और बजाओ थारी मुरली ने
थारी मुरली मनड़ो मोयो कान्हा,
और बजाओ थारी मुरली ने।।
आ मुरली मीरा नै मोई,
राणा जी ने छोड़ मीरा राम संग होई,
मेड़तिया छीटकायो काना,
इण मुरली ने नरसी मोई,
सरवर पाल खड़ी नानी बाई रोई,
आ के भात भरायो काना,
इण मुरली ने द्रोपती मोई,
भरी सभा में झुर झुर रोई,
आ के चीर बढ़ाया कान्हा,
काना लागा रे पेरवा,
ब्रह्मलोक में हुई सेवना,
ब्रह्म रो वेद भुलायो कान्हा,
अबके करोनी आवण री देरी,
ओलबा लिख शीव बिकानेरी,
करीयोड़ा कवल निबाओ कान्हा,
गायक – सत्यनारायण जी शर्मा।
प्रेषक – सुभाष सारस्वा काकड़ा
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