
थे तो धरनी पधारया गंगा माय,
दोहा – गंगा जमुना सरस्वती,
भागीरथ रे भाव,
मृत्यु लोक में गंगा लायो,
तपने एकर पाँव।
त्रिवेणी थाने अरज करा,
ओ थेतो धरनी पधार्या गंगा माँ,
ओ गंगाजी थाने अरज करा,
अरे भागीरथ जनमीया दलीप रे रे,
सगर कुल रे माय,
भागीरथ जलमीयो दलीप रे रे,
गंगा लावन जप कियो रे,
घोर तपस्या रे माय,
ए गंगा लावन जप कियो रे,
ओ थेतो धरनी पधार्या गंगा माय,
गंगा राजी हुई भगत पर,
दर्शन दिना आय,
अरे मारे वेग ने कुण रोकेला,
जावु रसाकल रे माय,
भागीरथ शिवजी री करी तपस्या,
राली जटा रे माय,
धारा छूटी पंथ बुवारियो,
गंगा ने सागर में ले जाय,
गंगा कयो हरिद्वार सु,
कुम्भ कलश ले जाय,
डांगडी रात मोक्ष करावे,
जल सु पवित्र होय जाय,
अरे डांगडी रात मोक्ष करावे,
माली छवर कहे गंगा भेजीया,
पित्रा ने स्वर्गा माय,
आय गंगा सु रात जगावो,
आवागमन मिट जाय,
अरे आय गंगाजी सु रात जगावो,
गायक – प्रकाश माली जी & कुशल बारठ।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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