
थोड़ा देती है,
या ज्यादा देती है,
हमको तो जो कुछ भी देती,
दादी देती है,
मैया देती है।।
हमारे पास जो कुछ है,
इसी की है मेहरबानी,
हमेशा भेजती रहती,
कभी दाना कभी पानी,
सुख कर देती है,
और दुःख हर लेती है,
हमेशा भूखे उठते है,
कभी भूखे नहीं सोते,
भला तकलीफ कैसे हो,
हमारी मैया के होते,
दिया जो दादी ने हमको,
कभी कर्जा नहीं समझा,
दयालु मैया ने हमको,
हमेशा अपना ही समझा,
हमने ‘बनवारी’ माँ से,
बड़े अधिकार से मांगा,
दिया है खुश होकर माँ ने,
जब भी सरकार से मांगा,
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