
थोड़ी सी जिन्दगानी खातिर,
नर के के तू तोफान करे,
एक मिनट का नहीं भरोसा,
बरसों का सामान करे।।
काया रूपी सराय बीच में,
भक्ति करने आया तू,
देख देख धन माल खजाना,
मन मूरख इतराया तू,
अरे जोड़ जोड़ धन भेळा करिया,
करोड़पति कहलाया तू,
कुडम्बा खातिर बणा कमेड़ा,
बहुत घणा दुःख पाया तू,
ना खर्चे ना दान करे,
अरे बचपन सारा बिता दिया जी,
मिल बच्चो की टोली में,
फिर थारे भेरण चढ़े जवानी,
जद देखे जद होली रे,
अरे बुढ़ा होगा दाँत टूट गया,
सार रहे ना बोली में,
सारा घरका ने खारो लागे,
खाट घाल दे पोळी में,
अरे भाई बन्धु थारो कुटम्ब कबीलो,
सब मतलब की मनवार करे,
जिस घोड़ी पर चढ़ा करे था,
घोड़ी जायेगी नाट तेरी,
कर त्रिया संग हेत भावळा,
जोड़ी जायेगी फाट तेरी,
भाई बन्धु भेळा होकर,
तोड़ी जायेगी खाट तेरी,
श्मशाना में गेर चिता पर,
फोड़ी जायेगी टाट तेरी,
निकल जाएगी आट तेरी,
ना ईशवर का गुणगान करे,
बड़े बड़े भी चले गए,
जो निर्भय हो डोल्या करते,
तेरा क्या अरमान भावळा,
धरती न तोल्या करते,
अरे दादा शंकर दास मेरे,
गूढ़ अर्थ खोल्या करते,
नन्दलाल कहे पिता केशवराम जी,
राम नाम बोल्या करते,
अरे शत की वाणी बोल्या करते,
फिर ईशवर नय्या पार करे,
प्रेषक – धीरज कुमार,
गाँव कुली जिला सीकर (राजस्थान)
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