
दर ब दर ठोकरे खा तेरे,
दर जो आते है,
सर पे खुशियों का बाँध सेहरा,
घर को जाते है,
तेरे दर पे बुझे चिराग,
जगमगाते है,
तर्ज – तेरी उम्मीद तेरा इंतजार।
दाने दाने को जो तरसते थे,
अब वो महिमा तेरी सुनाते है,
कैसे बदले है पल में दिन उनके,
किस्सा सबको वो अब बताते है,
श्याम चरणों में अपनी,
मैं को जो मिटाते है,
श्याम किरपा अगर हो जीवन में,
सुखी रोटी में स्वाद आता है,
जो नजर फेर ले मेरा बाबा,
भरे दिन में अँधेरा छाता है,
एक ही आसरा जो,
श्याम को बनाते है,
क्यों तू मन को निराश करता है,
दुनिया की अदालतों से डरता है,
राजे महाराजे ‘ललित’ मानित है,
तू क्यों ना भरोसा इनपे करता है,
आखरी फैसला तो,
बाबा ही सुनाते है,
गायक – ललित सूरी जी।
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