
दरबार तुम्हारे आया हूँ,
मेरा हाथ पकड़ लेना बाबा,
दुनिया का मैं ठुकराया हूँ,
तर्ज – आवारा हवा का झोंका।
सारी दुनिया तो रंगी है,
पल पल में रंग बदलती है,
इस दुनिया का मैं सताया हूँ,
जिस पर मैंने विश्वास किया,
उसने ही मुझको दगा दिया,
अपनों का मैं तड़पाया हूँ,
तुम सबकी विनती सुनते हो,
तुम सबकी झोली भरते हो,
मैं खाली झोली लाया हूँ,
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