
दर्शन देता जईजो जी,
सतगुरु मिलता जईजो जी।
दोहा – सतगुरु आवत देखीया,
जारे खांधे लाल बंदूक,
गोली दागी हरी नाम री,
तो भाग गया जमदुत।
सतगुरु मेरा बाणीया,
तो बीणज करे व्यापार,
बीन डांडी बनी ताकडी,
गुरू तोल दिया संसार।
दरशण देता जईजो जी,
मारे पिवरीये री बाता थोड़ी,
माने कहता जईजो जी।।
सोने जेडी पीली आ दुनिया बतावै रोग,
रोग दोग मारे काई नी लागे,
गुरू मीलण रो जोग,
मारे बाबे माने बींद बतायो,
पकड बताई बाय,
कोए को मे कोई ना समझु,
जीव भजन रे माय,
मारे देश रा लोग भला है,
पेरे कंटी माला,
फेरे कंटी माला,
मारा लागे वे भाई भतीजा,
राणा जी रा साला,
सासरीयो संसार छोडीयो,
पिव ही लागे प्यारों,
बाई रे मीरा ने गीरधर मोरीयो,
चरण कमल लीपटायो,
प्रेषक – नारायण जांगीड।
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