
दस वे कन्हैया होली किथे किथे खेली है/ਦੱਸ ਵੇ ਕਨ੍ਹਈਆ ਹੋਲੀ ਕਿੱਥੇ ਕਿੱਥੇ ਖੇਲੀ ਆ
दस वे कन्हैया, होली कित्थे-कित्थे खेली आ
दस, वे सांवरिया, होली, कित्थे-कित्थे खेली आ।।
किसके-किसके, रंग लगाए, किसकी, चुनरी रंगी आ।।
ओ दस, वे कन्हैया...
होली, कित्थे-कित्थे...
एक, सखी कहती, शाम, बरसाने में आया।।
दूजी, सखी कहती, राधा को बुलाया।।
तीजी, सखी कहती, इसने, हद पार की थी आ।।
एक, सखी कहती, मेरे घर में आया।।
दूजी, सखी कहती, साथ, ग्वालों को लाया।।
तीजी, सखी कहती, मेरी, साड़ी रंग दी थी आ।।
एक, सखी कहती, मुझे जाते हुए रोका।।
दूजी, सखी कहती, मेरा रास्ता रोका।।
तीजी, सखी कहती, मुझ पर रंग डाला आ।।
एक, सखी कहती, मेरी, बाहें मरोड़ी आ।।
दूजी, सखी कहती, मेरी, चूड़ी उसने तोड़ी आ।।
तीजी, सखी कहती, मेरी, मति मार ली थी आ।।
ना-ना, मेरी मैया, मैंने तो, होली नहीं खेली आ।।
ना किसी को, रंग लगाया, ना ही, चुनरी रंगी आ।।
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