
दासी हूँ तेरी श्यामा सेवा में साथ रख लो
दासी हूँ तेरी श्यामा,
सेवा में साथ रख लो,
मैं आपकी हूँ प्यारी,
अपने ही पास रख लो,
दासी हूँ तेरी राधे,
सुन लो मेरी कहानी,
श्री राधे मेहरबानी,
चरणों की रज में मुझको,
हरदम ही साथ रख लो,
अवगुण से भरी हुई हूँ,
द्वारे पर पड़ी हुई हूँ,
अपनी किरपा से श्यामा,
अवगुण तुम हमारे हर लो,
द्वारे पर पड़ी रहूँगी,
तेरा ही सुख चाहूँगी,
चरणों की देकर सेवा,
चरणों के पास रख लो,
स्वर – साध्वी पूर्णिमा दीदी जी।
प्रेषक – राघव।
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