
दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे
मोरछड़ी की महिमा देखो सब से न्यारी रे,
दुःख चिंता संकट काटे भक्त का भारी रे,
युगो युगो से श्याम धनि के संग में ये तो रहती है,
श्याम धनि की किरपा तो इस के जरहिये ही बहती है,
मुर्दे में भी प्राण फुक्दे ये बड़ी बलकारी रे,
श्याम बहादुर के हिट मंदिर पट इस ने खोल दिये,
बड़े बड़े तालो को इसने झट माटी में रोल दिये,
गूंजे फिर जैकारे नाम के आये श्याम बिहारी रे,
आलू सिंह जी के खाता में यह लहराई थी बहुत घनी,
लाखो भक्तो के विपदा में थी जिनके भी आशीष धरी,
चमत्कार में नमस्कार है जाने दुनिया सारी रे,
श्याम धनी को प्यारी भगता हिट कारी मोर छड़ी,
विपला की विनती है माहरे सागे रहियो सदा खड़ी,
वरणी ना जावे महिमा थी जाऊ बलिहारी रे,
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