
दुनिया बावलियों बतलावे
सावन आवन कह गया रे,
कर गया कोल अनेक ।
गिणता गिणता घिस गई रे,
म्हारी आंगलिया री रेख ।।
तू भी तो कोनी आवे,
दुनिया बावलियों बतलावे
थारी ओल्यू घणी आवे ।
बावलियों बतलावे रे मन्ने,
बावलियों बतलावे,
हेलो सुण ले सांवरा रे,
हो गई घणी अंधेर ।
तू ही तो खाया से झूठा,
भीलनी के घर बेर ।।
तरसावे सांवरिया तू क्यों,
हिवड़ो हरी जस गावे ।
बिच सभा में खड़ी द्रोपदी,
नैना बरसे नीर ।
तू ही बता गिरधारी वाको,
कौण बढ़ायो चीर ।।
डुब्या गज ने भाग बचायो,
सांवरिया क्यों सतावे ।
नींदडली दिन रात कटे रे,
कद खिचोला डोर ।
कुछ भी कोन्या भावे जब से,
ले गयो तू चित चोर ।।
प्रीत लगाकर के पछताणो,
लहरी हसतो जावे रे,
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