
तर्ज : इक प्यार का नगमा है
दूखियों कि मेरे बाबा
पार करता तू नैया है
मेरे बाबा तुझे आना
मेरा बन के खेवैया है
जब मन मेरा घबराता
कुछ समझ नही आता
बस याद करू तुझको
कुछ और नहीं भाता
तुझको अपने मन की
हर बात बतानी है
मेरे बाबा तुझे आना मेरा बन के खेवैया है
ऊपर से सभी देखे
अन्दर कि ना जाने कोई
अन्दर जितनी उलझन
बाहर हंसते ये नयन
अब आ भी जाओ बाबा
मुझे तेरी जरूरत है
सुख में तो सभी आते
दुख में ना कोई आता
मुझे जब भी जरूरत पड़ी
सदा तू ही नजर आता
अब तेरे भरोसे पे
"सीमा " कि जिन्दगानी है
दूखियों कि मेरे बाबा पार करता तू नैया है मेरे बाबा तुझे आना मेरा बन के खेवैया है
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