
दूर खड़े क्या देख रहे हो सांवलिये सरकार
दूर खड़े क्या देख रहे हो,
सांवलिये सरकार,
कन्हैया ले चल परली पार,
जहां बिराजे राधे राणी,
अलबेली सरकार,
तर्ज – साँवरीया ले चल परली पार।
मै तो हूँ कागज की नैया,
ना कोई माझी ना है खिवैया,
बन नाविक प्रभु नाँव संभालो,
क्यों छोड़ी मजधार,
मुझको ना आवे पूजा अर्चन,
श्याम करूँ क्या तुझको अर्पण,
मै तो बस चरणों का चाकर,
तू है प्राण आधार,
तेरे दरश को तरस रहे है,
नैन निगोड़े बरस रहे है,
निशदिन करते याद तुम्हे हम,
मत भूलो सरकार,
कई जनम लिए तुमको ना पाया,
‘नंदू’ अब की मन भर आया,
जन्मो की परवाह नहीं मुझे,
गर तू खेवनहार,
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