
तर्ज – हाल क्या है दिलों का ना
दूल्हा बनकर के,
शंकर चले जिस घड़ी,
घर हिमाचल के,
आना गजब हो गया,
क्या अजब शान थी,
क्या गजब रूप था,
शिव का दूल्हा बनाना,
गजब हो गया,
धरती अम्बर हिला,
शिव का डमरू बजा,
देवता सब चले,
अपना वाहन सजा,
भुत प्रेतों के संग आए शुक्र शनि,
शिव का घोतक रचाना,
ब्रम्हा विष्णु जी देखो,
बाराती बने,
शिव के ब्याह में,
हिमाचल की नगरी चले,
धीरे धीरे लगे साज बजने सभी,
शिव का डमरू बजाना,
बैल पे बैठके,
राख तन पे मले,
काँधे झोला बड़ा,
नाग विषधर गले,
दूल्हा बूढ़ा सा जोगी है,
लम्बी जटा,
चंदा मस्तक सजाना,
क्या बाराती अजब से है
भोले के संग,
हाथी घोड़े पे है कोई,
मस्त मलंग,
मैना रानी ने देखा ये,
जब माजरा,
‘बिन्नू’ शिव का ये बाना,
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