
दूल्हा बने त्रिपुरारी जू,
शिव भोला भंडारी जू,
आज सुनो शिव जी के द्वारे,
भीड़ मची है भारी जू,
भूत प्रेत सब जुर मिल आये,
ढंग बड़े बेढंगा जू,
लूला लंगड़ा काना कुबड़ा,
कोऊ कोऊ नंग धडंगा जू,
कौनऊ दुबरौ कौनऊ पतरौ,
कौनऊ कौनऊ भारी जू,
राख ओल बाघंबर पहने,
बहे जटा सें गंगा जू,
कंकन हाथ बांध बिछुअन के,
लिपटो गरे भुजंगा जू,
हाथी घोड़ा जूजो नैयां,
डूंड़ा करी सवारी जू,
देख दशा भोले की बोले,
देवों सें जगदीश्वर जू,
अपनी टोली अलग बना लो,
अलग चलें नंदीश्वर जू,
संग निगें तौ पर पुर जाकैं,
कटहै नाक हमारी जू,
सुन सुन बातें कमलापति की,
भोले मन मुस्कावें जू,
ऐसौ भलौ स्वभाव हरि के,
व्यंग वचन न जावैं जू,
भले दूर सें निगौ छवि न,
मन सें हटै तुम्हारी जू,
बाजन लागे ढोल ढमाढम,
बजन लगो रमतूला जू,
देख देख सब हंसी उड़ावें,
भलौ बने है दूल्हा जू,
नाचन लागे भूत प्रेत,
भई चलवे की तैयारी जू,
उतै हिमाचल जू नै अपनो,
ऐसो नगर संवारौ जू,
आज लगै ऐसै जैसै,
धरती पै स्वर्ग उतारो जू,
गली गली और नगर नगर की,
देखो शोभा न्यारी जू,
पहुचन लगी बारात नगर में,
देखन खौं सब आये,
पैल देख देवों की टोली,
सब मन में हर्षाये जू,
जब देखी दूल्हा कि सूरत,
भगदड़ मच गई भारी जू,
घर घर में सब खबर सुना रये,
ऐसी लड़का बाले जू,
बड़ो भयंकर दूल्हा देखो,
संग भूत मतवारे जू,
देखत जिंदा बचो समझलो,
ऊकी किस्मत भारी जू,
मैना रानी बड़ी दुखी भई,
जियत उमा न ब्याहों जू,
लै बिटिया खों गिरौ कुंआ या,
खाय जहर मर जाहों जू,
तब आये नारद जी,
आकैं सबरी बात संवारी जू,
भओ शिव के संग ब्याव उमा कौ,
घर घर बजे बधाये जू,
मंगल गान अप्सरा गावें,
देव फू्ल बरसावै जू,
विदा भई शिव संग उमा की,
खुशी भये नर नारी जू,
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रचनाकार एवं गायक – मनोज कुमार खरे।
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