
दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे,
चली बारात गोरा जी के द्वारे,
इस दूल्हे पे जग है दीवाना,
ना रतन आभूषण तन पे,
बलिहारी जाऊ बोले पण पे,
चमके माथे पर चंदा आये शुभ दिन ये शिव की लगन के,
डाले सर्पो के हार कैसा अज़ब शृंगार ऐसा बंदा किसी ने देखा न,
लम्भी लम्भी जटाओ का सेहरा कैसा प्यार विवाह का नजारा,
ध्वनि संख नाद की गूंजे संग चले बड़ो का पहरा,
होक नंदी पे सवार चले हिमाचल के द्वार,
हुआ रोशन ये तब री जग सारा,
चले हो के विदा जो बाराती गोरा को माँ समजाति,
जा बेटी सुखी तू रहना रहे अमर सुहाग की जोड़ी,
ये बाराती बेशुमार दिये सब को उपहार,
झूमे गल पाके सब नजराना,
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