
दे बंदगी दे बंदगी ,
तुझे पाने का, सरल सबसे उपाय ,
जिससे तू मिल जाए, बने जिंदगी ,
रंग भजन का तबहै, मन पे चढ़ता
सत्संग में जब कोई आगे बढ़ता
बिन संतो के सत्संग भी नहीं मिलता,
आनंद हरि कृपा से संतहै मिलता
धुन्न : (तर्ज़)
ओ हंसिनी,ओ हंसिनी..
भजन रचना ::
*श्रद्धेय बलराम जी उदासी,
एकादशी वाले, बिलासपुर छ. ग.
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