
देवता भी स्वार्थी थे दौड़े अमृत के लिए
देवता भी स्वार्थी थे,
दौड़े अमृत के लिए,
हम सदा उनको भजेंगे,
जो जहर हंस के पिए,
हम नमन उनको करेंगे,
तर्ज – हर करम अपना करेंगे।
जो रहे अमृत के पीछे,
सोचो वो क्या देव है,
जगत के खातिर विष पिया जो,
वो बने महादेव है,
जो सदा सबको दिए,
औरो के खातिर जगत में,
सब नहीं जी सकते है,
जो है अविनाशी अजन्मा,
जहर वही पी सकते है,
जो मरे ना ना जिए,
स्वर – धीरज कांत जी।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


