
देवरिया केसरिया कंवर जी कथा,
अरे भाईडा प्रथम सिवरू,
गणनायक गणराज,
माता अमिया रा सिवरू लाडला रे जियो,
अरे देवी सिवरू थाने शारदा जी मात,
देवी सिवरू थाने शारदा जी मात,
हिवडे उपजावो गंगा ज्ञान री ओ जियो,
अरे केसरिया कंवर बिराजे धाम,
देवरिया माय,
केसरिया कंवर बिराजे धाम,
गाथा गावु मै कंवरा आपरी ओ जियो।।
अरे केसरिया कंवर जी थे,
करजो सबरी सहाय,
केसरिया कंवर जी थे,
मै तो अज्ञानी बालक आपरा ओ जियो,
अरे केसरिया कंवर जी रा,
परचा जग में जोर,
केसरिया कंवर जी रा,
साचो दरबार धणीया आपरो ओ जियो,
अरे ओ कंवरा सिवरे जिनरी,
करजो सहाय,
कंवरा सिवरे जिनरी,
भगता रे हलकारे वेगा आवजो ओ जियो,
अरे भाईडा इन्द्र गाजे,
आयो मास आषाढ,
भाईडा इन्द्र गाजे आयो,
मास आषाढ,
बिरखा बरसे है घणी जोर री ओ जियो,
अरे भाईडा मेवुडो बरसे,
हर्षे सब किसान,
भाईडा मेवुडो बरसे,
मयंक रामजी बेलीयाँ जोतीया ओ जियो,
अरे भाईडा मयंक रामजी,
आया खेता माय,
भाईडा मयंक रामजी,
आयने खेता मे हलीयो हाकीयो ओ जियो,
अरे भाईडा बेलीयाँ चाले मूरत,
अडी हल माय,
भाईडा बेलीयाँ चाले मूरत,
आकाशा गूंजी है वाणी जोर री ओ जियो,
अरे भाईडा बेलीयाँ सामी,
आयो वासक नाग,
भाईडा बेलीयाँ सामी,
मयंक रामजी मन में कांपीया ओ जियो,
अरे भाईडा बोलीया वासक,
मत डर मयंकराम,
भाईडा बोलीया वासक,
मै तो दखल नही देवु आपने ओ जियो,
सुनले मयंकराम,
तू तो सेवक है म्हारो आज सु ओ जियो,
अरे मानवी करजो म्हारी,
साची मन सु सेव,
मानवी करजो म्हारी,
थारा तो मनोरथ पूरा होवसी ओ जियो,
अरे ओ सेवक वचन देवु,
मै तो थाने आज,
सेवक वचन देवु मै,
तो थाने आज,
पीढी़ पीढी हीत राखसु ओ जियो,
अरे भाईडा कोल वचन कर,
वासक होया आलोप,
सुनो आगे री सगली वार्ता ओ जियो,
अरे भाईडा रूघरवाल जी थरप्यो,
कंवरा रो थान,
भाईडा रूघरवाल जी थरप्यो,
अब तो दुखीयारा आवे धाम पे ओ जियो,
अरे केसरिया कंवर बोल्या,
सुनले सेवक बात,
केसरिया कंवर बोल्या,
थारे कहयोडा वचन सिद्ध होवसी ओ जियो,
अरे भाईडा सर्प डसीया,
आवे देवरिया धाम,
भाईडा सर्प डसीया,
ताती बांधत ही विष परो हटे ओ जियो,
अरे भाईडा कष्ट मिटावे,
कंवर केसरिया आप,
भाईडा कष्ट मिटावे,
भगतो रे हलकारे हाजिर देवता ओ जियो,
अरे सेवक जी बीस वर्ष तक,
करी कंवरा री सेव,
सेवक जी बीस वर्ष तक,
पछे सिधाया अमर धाम पे ओ जियो,
अरे वासक बोल्या मूलजी,
बैठो गादी आप,
वासक बोल्या मूलजी,
ईट तो सम्भालो अब थे आपरो ओ जियो,
अरे भाईडा पैसठ साल तक,
करी मूलजी सेव,
भाईडा पैसठ साल तक,
पछे दलाजी ने इष्ट जागीया ओ जियो,
अरे केसरिया कंवर गादी,
सुनी राखी नाही,
केसरिया कंवर गादी,
तेरह वर्ष को बालक करे सेवना ओ जियो,
अरे भाईडा दूर दूर सु,
परखन आया लोग,
भाईडा दूर दूर सु,
परचो देख्या सब अचरज कर रया ओ जियो,
अरे भाईडा अब हर्षे सगला,
नर ओर नार,
भाईडा अब हर्षे सगला,
कंवरा रा जयकारा गूंजे जोर रा ओ जियो,
देवरिया में धाम,
सगला धर्मों रा आवे जातरी ओ जियो,
अरे पचपन वर्ष दलाजी करी,
वासक री सेव,
पचपन वर्ष दलाजी करी,
अरे भाईडा तीन महीना सु,
जागी पाछी ज्योत,
भाईडा तीन महीना सु,
सेवा अब करे बंशीलाल जी ओ जियो,
अरे भाईडा वर्ष अठारह,
करी बंशीजी सेव,
भाईडा वर्ष अठारह,
पछे सिधाया स्वर्गा मायने ओ जियो,
अरे भाईडा “लखन चौधरी”,
संग महरा मनीष,
भाईडा लखन चौधरी,
महिमा गाई देवरिया धाम री ओ जियो,
लेखक – लखन चौधरी जी।
गायक – हेमराज गोयल व दीपा।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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