
दो चार साँसे बाकी रहे तो,
इतना सा मेरा इंतजाम करना,
तस्वीर जो तेरी रखी जो घर में भूलू न उसको परनाम करना,
दो चार साँसे....
एहसान तेरा कैसे चुकाऊ बस जाते जाते सिर को झुकाउ,
हे श्याम सूंदर लाखो किये है इतना सा इक और एहसान करना,
मिल न सका मैं तुमसे कन्हियाँ,
फिर इसका मुझको गम न रहेगा,
मुझको कन्हियाँ अपना समज कर अगले जन्म में पहचान रखना,
चाहे न देना इज्जत और सोहरत दौलत कमाने की मोहलत न देना,
तस्वीर तेरी हो मेरी घर में इतना मुझे धन वान रखना,
जब तक न निकले ये सांस मेरी वनवारी निरखु तस्वीर तेरी,
तस्वीर सीने से कस के लगा लू हाथो में बस इतनी सी जान रखना,
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