
धरती रा तो धणियो मोमा,
ऊजजेणी रा वीर,
वार चढो भक्तों री मोमा,
आय बंधावो धीर,
मोमाजी रा घोङला ए,
ऊङे आकाशो माय,
पृथ्वी ऊपर परचा थारा,
दर्शन दुनिया आय।।
म्हारी रे नगरी में मोमा,
थोंरो है उपकार,
भक्तों रे बुलाया आवजो,
होय घोङले असवार,
पग पग थोंरी देवली,
पग पग थपिया थोन,
माखी रे भणकारे आवे,
भक्तों रा भगवोन।।
गायो ने भायो रे वाली,
राखो मोमा लाज,
अभखी वेला वेगा आवजो,
मोमाजी महाराज,
मृत्युलोक रा मानवी,
करे है अरदास,
थारोङे भकतो री मोमा,
मन री पुरो आस।।
बिजरोल खेङा री माहि,
मोमाजी रो धोम,
हंजोजी भोपोजी सुमरे,
मोमाजी रो नोम,
जोगाराम प्रजापति गावे,
मोमाजी रा गुणगोन,
कमलेश देवासी आयो,
शरणं में राखो भक्त रो मोन।।
गायक / लेखक – जोगाराम प्रजापति।
हाथीतला बाङमेर।
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