
धिन माता धिन धरती ए,
तन कदे न देखी फिरती ए,
बड़ा बड़ा नर गीटगी ए,
धरती रो धणियाप करंता,
केई नर होगिया आगे,
रावण कुंभकरण सा योद्धा,
गया धड़िंदा खाता ए,
भीम सरिखा बलवत योद्धा,
नीत वट करता कुस्ती है,
हिमाले मे हाड गालयो,
तोई नहीं आई सोमवती ए,
तारु तो नावड़िया चाले,
नदिया चाले गीरती ए,
चांद सूरज चारो बेचारे,
नतर हाले फिरती ए,
देवनाथ गुरु पुरा मिलिया,
सतगुरु मिलिया सीवरती ए,
ए कहे रैमान सुणो भाई साधो,
जाती जोग भगत की रे,
प्रेषक – महेंद्र ढाका।
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