
( तर्ज - बहुत प्यार करते हैं तुमको सनम )
ध्यान मेरा रखते हैं शिव हर - पल
आज दिन दुख के हैं अच्छा आएगा ये कल
खाली हाथ तेरी चौखट पे आया था
ना कोई फूल ना जल में चढ़ाया था
फिर भी मिल रहा मुसीबत का हल
एहसान तेरे बाबा भुलाऊं मैं कैसे
बगिया को माली मिला मिला मुझको ऐसे
कांटों को कर रहा सुंदर कमल
ना ही कोई नाम जब किया मैंने बाबा
तेरी याद का मुझको नशा मेरे बाबा
लकी की आंखें हुई है सजल
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