
नगरी नगरी द्वारे द्वारे ढूँढूँ रे सांवरिया
नगरी नगरी द्वारे द्वारे,
ढूँढूँ रे सांवरिया,
कृष्णा कृष्णा रट के मैं तो,
हो गई रे बावरिया,
तर्ज – नगरी नगरी द्वारे द्वारे।
बेदर्दी मोहन ने हमको,
सौंपा ग़म की आग में,
बिरहा की चिंगारी भर दी,
दुखिया के संसार में,
पल-पल मनवा रोए छलके,
नैनों की गगरिया,
आया थी अँखियों में लेकर,
सपने क्या-क्या प्यार के,
जाता हूँ दो आँसू लेकर,
आशाएं सब हार के,
दुनिया के मेले में लुट गई,
जीवन की गठरिया,
दर्शन के दो भूखे नैना,
जीवन भर न सोएंगे,
बिछड़े मोहन तेरे कारण,
रातों को हम रोएंगे,
अब न जाने कृष्णा कैसे,
बीतेगी उमरिया,
प्रेषक
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