
नर गाफल में क्यों सुतो रे ओढ़ भरम रो भाकलीयो
नर गाफल में क्यों सुतो रे,
ओढ़ भरम रो भाकलीयो।
ईश्वर रा गुण गावत गावत,
मालिक रा गुण गावत गावत,
एडो काई आयो थाने थाकलीयो,
ओड भरम रो भाकलीयो,
सत री संगत में कभी नहीं बैठे,
मूर्ख राखे मन मे टेटे,
अरे ज्यु ज्यु पापी पुरबला जेटे,
कियो नहीं माने कोई रे,
बंदा कियो नहीं माने कोई रे,
जहर हलाहल चाकलीयो,
मतलब का जीव दसो दिश भटके,
अरे उठ प्रभाते जावे जट के,
मूंगरी पेडा थारे पैसो खटके,
सांझ पडीया रयो सोय रे,
बंदा सांझ पडीया रयो सोय रे,
बंदा सोय ने फाडीयो बाकलीयो,
अरे थूल कपट में राजी बाजी,
अरे हस हस बात बनावे ताजी,
अरे देई थारी जरणी लागी,
अरे जन्म देई थारी जरणी लागी,
मिनक जन्म ने खोय रे,
बंदा मिनक जन्म ने खोय रे,
बंदा घोडो नरका हामी हाकलीयो,
राम बिना थारो कोई नहीं संगी,
सिंह पूछ माथे नहीं टाकी,
एक बात थारे रे गई बाकी,
नाथ नही नाक में थारे,
बंदा टूटने बांधीयो थाकलीयो,
कहे दानाराम सुन मेरे प्यारे,
हरी हिसाब लेवे न्यारे न्यारे,
होंठ कंठ छिप जासी थारे,
सायब रे थू सनमुख वेला,
किकर बतावे थारो आंकलीयो,
गायक – शंकर जी टाक।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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