
ना जाने किस रूप में आकर काम मेरा कर जाता है
ना जाने किस रूप में आकर,
काम मेरा कर जाता है,
जब भी दिल से श्याम पुकारू,
लीले चढ़ आ जाता है।।
तर्ज – तेरी कृपा से श्याम प्रभु।
दर दर भटक रहा था मैं तो,
मिलता नहीं सहारा,
जीवन नईया बीच भंवर में,
दूर बहुत था किनारा,
बनकर मांझी मझधार से,
पार मुझे कर जाता है,
तेरी दया से ओ सांवरिया,
चलता है परिवार मेरा,
खुशियां दे दी इतनी तूने,
महक रहा संसार मेरा,
जब जब मुझ पे संकट आता,
तू ही साथ निभाता है,
सुख भी आये दुख भी आये,
हर पल लिया है नाम तेरा,
छोड़ दिया था अपनों ने,
फिर तुमने पकड़ा हाथ मेरा,
बना ‘गोपाल’ का तुमसे अब तो,
जन्मों का ये नाता है,
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