
ना तो धन सम्पत्ति की कामना भजन लिरिक्स
ना तो धन सम्पत्ति की कामना,
ना तो यश वैभव की चाहना,
तू कुण्डलपुर का बादशाह,
हमें तेरे दर की तलाश है।
तू कुण्डलपुर का बादशहा,
हो मुझे आकर अपना दर्श दे,
मरे उम्र भर की ये आस है,
तू चांदनपुर की चांदनी,
तरा सारे जग में प्रकाश है,
तू तीन लोक का देवता,
तेरा भूमण्डल निवास है,
मैं करता तुझको बंदगी,
मेरी अरज सुनकर दरश दे,
मेरे उम्र भर की अरदास है।
तेरा दर है मेरी जिंदगी,
तेरे दर को कैसे मैं छोड़ दूँ,
मेरे दिल में तेरा ही वास है।
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