
नाम जपन क्यों छोड़ दिया,
क्रोध न छोड़ा झूठ न छोड़ा,
सत्य वचन क्यों छोड दिया,
तूने सत्य वचन क्यों छोड दिया,
तूने नाम जपन क्यों छोड़ दिया।।
झूठे जग में जी ललचा कर,
असल वतन क्यों छोड दिया,
कौड़ी को तो खूब सम्भाला,
लाल रतन क्यों छोड दिया,
जेहि सुमिरन ते अति सुख पावे,
सो सुमिरन क्यों छोड़ दिया,
खालिस इक भगवान भरोसे,
तन मन धन क्यों ना छोड़ दिया,
– भजन प्रेषक –
जितेंद्र कृष्ण जी पाराशर।
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