
पकड़ ले पाँव तू कस के हाथ वो खुद ही पकड़ेगा
पकड़ ले पाँव तू कस के,
हाथ वो खुद ही पकड़ेगा,
झुका ले सर को तू अपने,
ह्रदय से खुद वो लिपटेगा।।
तर्ज – जहाँ बनती है तकदीरें।
ये दर वो दर नहीं है जो,
सिफारिशों से चलता है,
यहाँ पे काम तो प्यारे,
सत्य के दम पे बनता है,
सुना ले बस भजन दिल से,
दर्द वो खुद समझ लेगा,
बांटने की तमन्ना रख,
लुटाने खुद वो बैठा है,
पकड़ ले हाथ निर्बल का,
जिताने खुद वो बैठा है,
ना तू घबरा रुकावट से,
वो खुद ही सब निपट लेगा,
खामियों को ही रटने की,
पुरानी आदत है जग की,
खूबियों को परखने की,
खासियत है तेरे दर की,
‘शुभम-रूपम’ हार को भी,
जीत में वो बदल देगा,
स्वर – शुभम रूपम।
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