
पलकों का घर तैयार सांवरे,
मेरी अँखियाँ करे इंतजार साँवरे,
आँखों के असुवन जल से,
तेरे चरण पखारूंगा मैं,
पलको की कंघी से तेरे,
बाल सवारूँगा मैं,
मौका सेवा का दे एक बार सांवरे,
मेरी पलकों का घर तैयार सांवरे।।
पुतली के दरवाजे ऊपर,
पलको का है पहरा,
प्रेम है ये निस्वार्थ हमारा,
सागर सा है गहरा,
हम तेरे हुए तलबगार सांवरे,
बड़े भाव से बड़े चाव से,
तेरा लाढ़ करेंगे,
जहाँ रखोगे कदम कन्हैया,
वही पे हाथ रखेंगे,
ख्वाहिश पूरी करो एक बार सांवरे,
महलों जैसे ठाठ नहीं,
घर देखने तो आओ,
रहना ना चाहो कम से कम,
आजमाने तो आओ,
‘मोहित’ दिल से करे मनुहार सांवरे,
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