
पार लगाजो जी साँवरिया,
श्लोक – वसुदेवसुतं देवं,
कंसचाणूरमर्दनम,
देवकी परमानन्दं,
कृष्णं वंदे जगद्गुरुम।
दोहा – नथनी कर के राखियो,
तुम नाथन के नाथ,
ऐसी नाथ ना कीजियो,
जो मैं बिकूँ पराए हाथ।
अन्नदाता म्हाने,
भूल बिसर मत जाजो जी,
गोविंदा म्हाने,
स्वारथ का म्हे बण्या पुतला,
करनी ने मत जाजो म्हारा सांवरा,
सारा अवगुण ढक लीजो म्हारा,
सारा अवगुण ढक लीजो,
चरणा रो दास बना जो,
नेम धरम जाणा कोने छा,
थे ही आर सीखाजो म्हारा सांवरा,
कठिन तपस्या निभणी कोने,
सीधो पंथ बता ज्यो,
चोखा चोखा भगत घणा छे,
वा में मत रम जा ज्यो म्हारा सांवरा,
दौड्या दौड्या आ जा ज्यो,
दीना री लाज बचा ज्यो,
युगल शरण रो लियो रे आसरो,
मोह जंजाल छुड़ा जो म्हारा सांवरा,
करुणा जल बरसा जो म्हापे,
हस हस कंठ लगा जो,
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