
पिंजरा के पंछी बोले रही रही के कुण्डी खोले छत्तीसगढ़ी भजन
पिंजरा के पंछी बोले,
रही रही के कुण्डी खोले,
मोला पार लगादे राम,
मोला जाना है,
जाना है राम लाला के धाम।।
राम राम के नाम ला लेवत,
फुर फुर में उड़ जाहु,
कतको मोला पकड़बे तेहा,
तोर हाथ नई आहु,
कतको मोला पकड़बे मेहा,
तोर हाथ नए आहु,
तोर चरण मा में गिर जाहु,
जीवन ला सुफल बनाहु,
का करहु तोर रतन सिहासन,
का तोर महल अटारी,
मोर बर सब माटी के ढेला,
सुनले रे संगवारी,
सुन ले रे संगवारी,
जब तोर संदेशा आही,
सुवना मोर तन के उड़ाही,
लाला चंचल राम दरश बर,
जीवन भर गुन गाइस,
राम नाम के महिमा गाके,
दुनिया मा बगराईस,
बेनाम के सुनले बानी,
सुवना ये तन के परानी,
गायक / प्रेषक – चंदन धीवर।
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

