
पैदल चलता चलता जय बोलो जालन्धर नाथ जी की
पैदल चलता चलता,
जय बोलो जालन्धर नाथ जी की,
जालन्धर नाथ जी की,
जय जय शांतिनाथ जी की,
कनकाचल पर्वत पर बनीयो,
सिरे मन्दिर हद भारी,
दूर दूर सु दर्शन करवा,
आवे नर और नारी,
अरे दूर दूर सु दर्शन करवा,
भंवर गुफा मे तपीया देखो,
बडा बडा तपधारी,
चन्द्रकुण्ड रो निर्मल पानी,
काटे रोग बिमारी,
अरे चन्द्रकुण्ड रो निर्मल पानी,
रतनेश्वर महादेव रो मन्दिर,
भगतो रे मन भावे,
भोलो शंकर निज भगता रा,
पल में कष्ट निवारे,
शांतिनाथ जी साचा सतगुरु,
गादीपति कहलावे,
जो कोई शरने आपरी आवे,
उनने पार लगावे,
सिरे मन्दिर री महिमा कोई,
दास अशोक सुनावे,
सिरे मन्दिर री महिमा,
कोई दास अशोक सुनावे,
तपो भूमि जालौर धरा ने,
सादर शिश निवावे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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