
पौड़ी पौड़ी चढ़ते जाओ
पौड़ी पौड़ी, चढ़ते जाओ, जय माता दी, करते जाओ ॥
आ गई आँ ॥मैं कटड़े, शहर में, आ गई आँ ।
लै लैण दे ॥मैनूं मईया, दीआँ भेटां, लै लैण दे ।
आ गई आँ ॥मैं बाण, गंगा, आ गई आँ ।
कर लैण दे ॥मैनूं गंगा, इश्नान, कर लैण दे ॥
आ गई आँ ॥मैं चरण, पदुका, आ गई आँ ।
छूह लैण दे ॥मैनूं मईया, दे चरण, छूह लैण दे ।
आ गई आँ ॥मैं अर्ध, कुँवारी, आ गई आँ ।
लंघ लैण दे ॥मैनूं गर्भ, जून चों, लंघ लैण दे ।
आ गई आँ ॥मैं हाथी, मथ्था, आ गई आँ ।
चढ़ लैण दे ॥मैनूं होर, चढ़ाइयाँ, चढ़ लैण दे ।
आ गई आँ ॥मैं सांझी, छत ते, आ गई आँ ।
कर लैण दे ॥थोड़ा जेहा, आराम मैनूं, कर लैण दे ।
आ गई आँ ॥मैं भैरों, दे मंदिर, आ गई आँ ।
नहीं करना ॥मैं भैरों, दा दर्शन, नहीं करना ।
आ गई आँ ॥मैं भवन, मईया दे, आ गई आँ ।
कर लैण दे ॥मैनूं मईया, दा दर्शन, कर लैण दे ।
जगा लैण दे ॥मैनूं मईया, दी जोत, जगा लैण दे ।
चढ़ा लैण दे ॥मैनूं मईया, नूं भेट, चढ़ा लैण दे ।
मंग लैण दे ॥मुँहों मंगियाँ, मुरादां, मंग लैण दे ।
भर लैण दे ॥मैनूं खाली, झोलियाँ, भर लैण दे ।
आ गई आँ ॥हुण भैरों, दे मंदिर, आ गई आँ ।
हुण करना ॥मैं भैरों, दा दर्शन, हुण करना ॥
आ गई आँ ॥मैं वापस, कटड़े, आ गई आँ ।
नहीं लगदा ॥बिन मईया, दे दिल मेरा, नहीं लगदा ॥
अपलोडर – अनिलरामूर्ति भोपाल
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