
प्रभु अपने दर से,
अब तो ना टालो,
गिरा जा रहा हूँ,
उठा लो उठा लो।।
खाली ना जाता कोई,
दर से तुम्हारे,
द्वारे खड़ा हूँ नन्ही,
बाहें पसारे,
चरणों की सेवा में,
लगा लो लगा लो,
नहीं टूट पायेगा,
दुनियाँ का बंधन,
जब तक कृपा ना होगी,
तेरी रघुनंदन,
कदम लड़खड़ाए है,
संभालो संभालो,
अगर था हटाना तो,
फिर क्यों बुलाया,
सोते ही रहने देते,
काहे जगाया,
अब जब जगाया तो,
अपना बना लो,
बंधन प्रताप सारे,
टूट चुके है,
जितने सहारे थे,
छुट चुके है,
अवसर मिला है अपना,
वादा निभा लो,
स्वर – श्री राजन जी महाराज।
प्रेषक – ओमप्रकाश पांचाल उज्जैन मध्य प्रदेश।
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