
प्रेमियों की नैया का,
बाबा खेवनहार,
मेरी नाव कभी ना डूबे,
नैया होती है पार,
श्याम ही खेवनहार।
तर्ज – मेरे सर पे रख दो बाबा।
आते संकट बहुत मगर वो,
सारे ही टल जाते है,
जिसने टेर लगाई बाबा,
नील चढ़कर आते है,
श्याम के चाकर है जो.
कभी होते ना लाचार,
मन की आँखों से देखो तो,
श्याम सामने दीखता है,
भक्तो की तकदीरें बाबा,
खुद हाथों से लिखता है,
कमी नहीं पड़ती है,
इतना देता दातार,
दिल के दरवाजे तो खोलो,
बाबा अंदर आएगा,
‘चोखानी’ ये बड़ा दयालु,
सखा तेरा बन जाएगा,
प्रेम बढ़ा ले इनसे,
तू प्रेम बढ़ा ले इनसे,
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