
बता दो हनुमान लंका कैसे जली
तेरी गर्जना से मची खलबली,
बता दो हनुमान कैसे लंका जली ।
चला मैं निशानी ले श्री राम की,
जहाँ बैठी थी मेरी माँ जानकी ।
दिखाई जो मुंदरी वो व्याकुल हुए,
उनको चिंता हुए मेरी जान की ।।
आसुरो से भारी लंका की गली ।
लगी भूख मुझको बड़ी जोर से,
देखी रावण की बगिया बड़े गौर से ।
फल थे सुंदर बड़े उनको खाने लगा,
मुझको आज्ञा मिली मैया की ओर से ।।
जमू माली को मेरी ये हरकत खाली ।
मैं भूखा था सैनिक अकड़ने लगे,
मेरे साथ आकर झगड़ने लगे ।
लिया पंगा मुझसे लगे मारने,
मेरे सोटे असुरो पे पड़ने लगे ।।
सूचना इसकी जब रावण को मिली ।
भेजा अक्षय मेरे हाथो मारा गया
जो भी आया था ससंमुख संहारा गया ।
लड़ने मुझसे वाहा मेघनाथ आ गया
साथ लेकर के वो ब्रह्मपाश आ गया ।।
बाँध मुझको घुमाया लंका की गली ।
मुझको रावण के सांमुख है लाया गया,
फैसला मिल के मुझको सुनाया गया ।
जो तबाही मचाई है इस दूत ने,
लगा दो मिलके आग इस की पूँछ में ।।
आ गया जब मेरी पूंछ जली,
देखो जी श्रीमान ऐसे लंका जली ।
प्रभु की सेवा में जो बँधा पहुचाएगा,
फिर मेरे क्रोध से वो ना बच ना पाएगा ।
बेधड़क जो शरण राम की आएगा,
रोमी कृपा सदा राम की पाएगा ।।
जग की माया से प्रभु की है सेवा भली,
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