
बना दे बिगड़ी दरबार तेरे आया श्याम
बना दे बिगड़ी,
दरबार तेरे आया,
दरबार तेरे आया,
दरबार तेरे आया,
बना दे बिगडी,
दरबार तेरे आया।।
निर्धन को धन,
कोढ़ी को तन,
बांझन लाल खिलावै,
कलयुग माहीं सेठ सांवरा,
कलयुग माहीं सेठ सांवरा,
लखदातार कुहावै,
बना दे बिगडी,
दरबार तेरे आया।।
अर्जी मेरी मर्जी तेरी,
मैं टाबर सूं थार.
एक बात को ध्यान राखियो,
एक बात को ध्यान राखियो,
और ना कोई म्हारो,
बना दे बिगडी,
दरबार तेरे आया।।
जो आवे खाली ना जावे,
कहती दुनिया सारी,
मेरी भी पत राख सांवरा,
मेरी भी पत राख सांवरा,
मैं शरणागत थारी,
बना दे बिगडी,
दरबार तेरे आया।।
घट घट की जानो सांवरिया,
‘घोटू’ के समझावै,
इब तो माल लूटा सांवरिया,
इब तो माल लूटा सांवरिया,
काहे देर लगावे,
बना दे बिगडी,
दरबार तेरे आया।।
बना दे बिगड़ी,
दरबार तेरे आया,
दरबार तेरे आया,
दरबार तेरे आया,
बना दे बिगडी,
दरबार तेरे आया।।
गायक – ईशु अग्रवाल बेरलिया।
9992460571
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