
तेरे पूजन को हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,
पड़ा तेरे चरणों मे हे माँ, मुझे भक्ति का दो वरदान,
किस ने जानी तेरी माया किस ने भेद तेरा है पाया,
हारे ऋषि मुनि कर ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
किस ने देखी तेरी सूरत कौन बनावे तेरी मूरत,
तू है निराकार हे माँ, बना मन मंदिर आलीशान,
ये संसार है तेरा मंदिर तू ही रमी है इसके अंदर,
करते ऋषि मुनि सब ध्यान, बना मन मंदिर आलीशान,
तू ही मन में, तू ही तन में तू ही बसी है सबके मन मे,
तू हर दिल मे है विराजमान, बना मन मंदिर आलीशान,
तूने राजा रंक बनाये तूने छोटे बड़े बनाये,
तेरी लीला बड़ी महान, बना मन मंदिर आलीशान,
झूठे जग की झूठी माया मूर्ख इसमें क्यो भरमाया,
करले जीवन का कल्याण, बना मन मंदिर आलीशान,
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