
बलिहारी जाऊं म्हारा सतगुरु ने किया भरम सब दूर
बलिहारी जाऊं म्हारा सतगुरु ने,
किया भरम सब दूर,
किया भरम सब दूर मेरा,
बलिहारी जाऊं मारा सतगुरु ने,
प्याला पाया प्रेम रा रे,
घोल संजीवन मूल,
चढ़ी खुमारी प्रेम की रे,
मन हो गया चकनाचूर,
कुमता घटी सुमता बढ़ी,
उर आनन्द भयो भरपूर,
राग द्वेष जगत की मेटी,
अब मन भयो मंजूर,
विमल होय परकाश लखियो,
बना शशि बना सूर,
मनवो मस्त रेवे अनहद में,
सुन के आनंद तूर,
शबद सुण्या गुरुदेवजी रा,
जब मुख पड गई धूड़,
धर्मिदास को आय मिल्या है,
सतगुरु श्याम हुजूर,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.


