
बल्ले बल्ले, ब्रिज विच, शाम आ गया ।
छावा छावा, ब्रिज विच, शाम आ गया
जिहदे, गल विच, काली गानी ।
ओहदी, अख, बड़ी मस्तानी ॥
सारी, दुनियां, होई दीवानी,
ब्रिज विच, शाम आ गया...
बल्ले बल्ले, ब्रिज विच...
ओहदे कुंडलां वाले वाल ।
ओहदी टेढ़ी मेढ़ी चाल ॥
लोकीं, कहिंदे, मदन गोपाल,
ऐहदे, वर्गा, ना कोई होर ।
ओ ऐहनूं, वेख के, नचदे मोर ॥
ऐहनूं, कहिंदे, मक्खन चोर,
वजदे, छैणे, ढोल नगाड़े ।
सुन लओ, सारे, भगत प्यारे ॥
आ जाओ, मिल के, नचिए सारे,
जेहड़ा, वी इस, दर ते आवे ।
मुँहों, मांगियां, मुरादां पावे ॥
जेहड़ा, राधे, राधे गावे,
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