
बाबा तू ही है कण कण में और सितारों में श्याम
बाबा तू ही है कण कण में,
और सितारों में,
तू ही दिखता है,
जग के नज़ारों में,
तर्ज – श्री राम जानकी बैठे।
अपनों से मैं जब बैगाना हुआ,
उल्फ़त में तेरी मैं दिवाना हुआ,
सदा रहते हो अब तुम विचारों में,
तेरे चरणों में श्याम जन्नत है,
मेरी तुझसे एक यही मन्नत है,
बदलो पतझड़ को आज बहारों में,
अब तक तो हुआ पुरा सपना नहीं,
क्या तु भी मेरा श्याम अपना नहीं,
मुझको रख लो तुम खिदमतगारों में,
गमों को ‘जालान’ अब कब तक सहे,
तु कुछ ना सुनें और कुछ ना कहे,
कुछ जुबां से कहो या इशारों में,
गायक – धीरज तिवारी,लखनऊ।
भजन रचयिता – पवन जालान जी।
09416059499 भिवानी (हरियाणा)
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