
श्यामा थारी मन में आवे,
बाबा थारी याद सतावे,
दो दिन रहजा पावणा,
रहजा रहजा पावणा,
देखे – कानुड़ा की याद आ गयी।
चांदी की कणकति घड़ा द्यूं,
लड़ लटका द्यूं न्यारी,
श्याम वरण पर धोली धोली,
लागे प्यारी प्यारी,
जामे घुँघरा बंधा द्यूं,
बाजूबंद भुजा में बाँधू,
गले में कण्ठी माला,
काना माहि झाला मुरकी,
आजा खाटू वाला,
जामें मोरनी मंडवा द्यूं,
जामो तो केसरियो ल्याद्यूं,
गहरो घेर घुमेर,
घुँघी वालो टोपियों,
जांके फूंदा चारु मेर,
जामें तम्बूरी तनवा द्यूं,
सोहन लाल तेरे द्वारे पर,
ऊबो हेलो मारे,
ज्ञान ध्यान कछु जाने नाही,
सीधो सट ही दहाड़े,
तो पे लूण राई वारुं,
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