
कब तक करूँ मैं इंतजार,बाबा पलकों का झाड़ा लेने वास्ते ।। कब ।।
तर्ज – तुझको पुकारे मेरा प्यार ।
झुर झुर अँखियाँ, नीर बहाये बाबा, द्वार पे तेरेनिष्ठुर बने क्यूं, बैठे हो स्वामी, मुझसे आँखों को फेरे,दुखियारे दिल की है पुकार, बाबा पलकों...
१ ।।
सर्वस्व तूं है, और ना कोई मेरा, दिल की सुनाऊँ,कैसे मनावूं, कैसे रुझावूं तुमको, समझ ना पाऊँ,मुझसे क्यूं ऐसा व्यवहार, बाबा पलकों...
२ ।।
भींगी ये पलकें नाथ, दरशा रही है दिल की दर्द कहानी,चौखट ये तेरी, किस्मत बदल दे, जो भी हो परेशानी,कर दो कुछ ऐसा चमत्कार, बाबा पलकों...
३ ।।
गुनाहों के पुतले हैं, माफी खता की दे दो, श्याम बिहारी,‘राजू’ की विनय पर, दया की नजर करदो, शरण है तिहारी,विनती करो ना स्वीकार, बाबा पलकों...
४ ।।
लिरिक्स – राजू चितलांगिया जी
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