
मैं आया उज्जैन महाकाल,
बाबा मुझे दर्शन दे,
दर्शन दे मुझे दर्शन दे,
तेरा प्यारा है दरबार,
आज मुझे दर्शन दे।।
तर्ज – मेनू नचणा मोहन दे नाल।
चिंतामण सब चिंता हरते,
मंगलनाथ है मंगल करते,
तेरी उज्जैनी नगरी कमाल,
काल भैरव से शक्ति मिलती,
हरसिद्धि माँ हर दुःख हरती,
यहाँ राधा के संग गोपाल,
क्षिप्रा तट उज्जैन विराजे,
कालो के महाकाल निराले,
‘मनीष’ का पकड़ ले हाथ,
स्वर – मनीष तिवारी।
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