
बैठ्यो बैठ्यो माल लुटावे रै
जद जद चानण ग्यारस आवै,
खाटू में मेलो भर जावै,
बैठ्यो बैठ्यो माल लुटावे रै,
म्हारों श्याम रंगीलो……..
मकराणे को भवन निराला,
सज धज बैठ्यो खाटू वालो,
मंद मंद मुस्कावे रै,
श्याम कचहरी श्याम लगावे,
हाकिम बन के हुकम सुनावै,
साँचो न्याय चुकावे रै,
श्याम रंगीलो म्हारों लाख दातारी,
अरजी लगावे दुनियाँ सारी,
सकी की आस पुरावै रै,
ग्यारस की देखी सगळाइ,
बिन बोल्या होवे सुँवाईं,
बाबो परचो दिखावे रै,
हर्ष धणी के मन जो भावै,
ग्यारस ने उपचेत बणावे,
बारस मोर लगावेँ रै,
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