
भंग दे प्याले
भंग दे, प्याले लगे, लंगर निराले,
नचते ने, देखो भोले, नाथ दे दीवाने ॥
दिन, शिवरात्रि का, आया भगतो ॥
पी के जइयो, थोड़ा, प्रसाद भंग का,
भोले, नाथ जी का, लंगर, लगाया भगतो ॥
भंग का, प्याला, भोले नाथ जी को जचता,
भगतों, प्यारियों को, पता हर सच का ॥
थोड़ा थोड़ा, सारियों लिए, आया भगतो ॥
भंग, असीं पीणी, प्रसाद वांग, भोले दी,
भगतां, प्यारिया दी, मौज शिव भोले दी ॥
शिव जी ने, सच, लिखवाया भगतो ॥
विजे, देवगन लिखे, भोले जी दे रंग नूं,
गाउँदा ए रोहित, भोले नाथ जी दी भंग नूं ॥
मंगदे नहीं, किसे तों वी, माया भगतो ॥
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