
भक्त बनता हूँ मगर
भक्त बनता हूँ मगर अधमों का हूँ सरताज भी
देखकर पाखंड मेरा हंस पड़े ब्रजराज भी
कौन मुझसे बढकर पापी होगा इस संसार में
सुन के पापों कि कहानी डर गये यमराज भी
क्यों पतित उनसे कहे सरकार तुम तारो हमें
हैं पतितपावन तो रखेंगे अपनी लाज भी
बिन्दु दृग के दिल हिला दें क्यों न दीनानाथ का
दर्द दिल भी साथ है और दुखभरी आवाज भी
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